Sunday, March 17, 2013

"Silent Words" from Heart ............... (Understanding the Un-understood words)

"Silent Words" from Heart ............... (Understanding the Un-understood words)


काश इस दिलको जुबान होती ....
तो दिलकी सारी बाते खुलेआम बयान होती ...
महसूस होनेवाली ख़ुशी , गुस्सा दिल खुदही बताता ...
यु ना गुंगा  रहकर सारे दर्द को अपने आप में ही छुपाता ...

काश इस दिलको जुबान होती ....

ख़ुशी होनेपर ये ठहाके लगाकर खिलखिलाता ...
कभी अपने गुस्से को चीख बनाके जोरोसे चिल्हाता ...
इसे भी कडवी बातो से दर्द होता है ये वो सबको बताता ...
इसे खुदको भी कुछ आत्मसन्मान है ये किसी को समजाता ....

काश इस दिलको जुबान होती ....

कितनी रातो से दिल  सोया नहीं ये उसे बताता ...
सपनोके साथ विश्वास टूटने का दर्द क्या होता है ये उसे सुनाता ...
क्यू में लोगो की झूठी बातो में फसता रहता हु ये कहके खुदको कोसता ...
दिलकी सारी  भड़ास निकलने के लिए शब्दों के सहारे नए रास्ते ये खोजता ....

काश इस दिलको जुबान होती .....

न  जाने कितना दर्द ये खुदमे  छुपायेगा ...
पगला हमेशा सोचता रहेगा की इस दर्द को सामनेवाला खुद ही समझ  जायेगा ....
हर रातको छुप  छुपकर अंधेरे में ये घुट घुटकर  रोयेगा ....
इसके शब्दों से सामनेवाले के दिलको दर्द न हो ये सोचकर  हरबार चुप हो जायेगा ....

काश इस दिलको जुबान होती ....

बोल पाता  तो आज ये तुझे  बता देता की क्या है इसे केहना  ...
आज भी इस दिलको क्यू सिर्फ तेरे साथ ही है रहना ....
क्यू आज भी ये दिल बस तेरे और सिर्फ तेरे  लिए ही धड़क पाता है….
पता नहीं  क्यू आज भी ये जो मेहसूस करता है वो तुजे क्यू बता नहीं पाता  है ....

सचमे काश इस दिलको जुबान होती .....
तो ये उलझन भरी ज़िन्दगी थोड़ी आसान होती .....